हरेली महोत्सव में पूर्व मुख्यमंत्री ने भाजपा सरकार को घेरा, बोले:-बोली-भाखा, संस्कृति और परंपराएं ही हमारी पहचान; सरकार छत्तीसगढ़ियापन खत्म करने में लगी
दुर्ग। छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं और संस्कृति का पर्व हरेली इस बार डुंडेरा में राजनीतिक संदेशों के बीच मनाया गया। ग्राम डुंडेरा में आयोजित हरेली महोत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़िया अस्मिता और संस्कृति को लेकर भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की परंपरा प्रकृति, खेती और यहां की दिनचर्या से गहराई से जुड़ी हुई है। रोपा-बियासी के बाद हरेली तिहार में कृषि यंत्रों की पूजा और घरों में नीम की टहनियां लगाने जैसी परंपराएं हमारी जीवनशैली और संस्कृति का अभिन्न हिस्सा हैं।
भूपेश बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़िया पहचान को कभी नहीं भूलना चाहिए, क्योंकि इसी पहचान में हमारी अस्मिता निहित है। उन्होंने कहा कि हमारी बोली-भाखा, संस्कृति, परंपराएं और लोक जीवन ही हमें दूसरे क्षेत्रों से अलग पहचान देते हैं। आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान भाजपा सरकार के कार्यकाल में छत्तीसगढ़ की बोली और भाषा में बदलाव किए जा रहे हैं और धीरे-धीरे हमारी सांस्कृतिक पहचान को कमजोर करने का प्रयास हो रहा है।
उन्होंने कहा कि उनकी सरकार के दौरान छत्तीसगढ़ की परंपराओं और लोक खेलों को बढ़ावा देने के लिए छत्तीसगढ़िया ओलंपिक की शुरुआत की गई थी। फुगड़ी, गेड़ी दौड़ सहित अनेक पारंपरिक खेलों को मंच मिला और नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि यहां की मिट्टी, खेती, लोकभाषा, तीज-त्योहार और परंपराओं से बनती है।
भाजपा सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
भूपेश बघेल ने अपने संबोधन में भाजपा सरकार की नीतियों पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सरकार एक ओर महतारी वंदन योजना के माध्यम से राशि देने का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर लोगों को भारी-भरकम बिजली बिलों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बिजली कटौती बढ़ने, स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली और गैस सिलेंडर के लगातार बढ़ते दामों को लेकर भी सरकार को घेरा।
उन्होंने स्वामी आत्मानंद स्कूलों में फीस लिए जाने, किसानों को डीएपी की किल्लत होने और व्यापारियों के माध्यम से किसानों के लूटे जाने का आरोप लगाया। मंदिर में चंदा चोरी के मुद्दे का उल्लेख करते हुए उन्होंने सरकार पर विभिन्न मोर्चों पर विफल रहने का आरोप लगाया।
भूपेश बघेल ने जंतर-मंतर पर बच्चों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को संसद में आकर जवाब देना चाहिए, लेकिन वे जवाब देने से बच रहे हैं।
ताम्रध्वज साहू ने गिनाईं भूपेश सरकार की उपलब्धियां
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पूर्व मंत्री ताम्रध्वज साहू ने कहा कि मुख्यमंत्री के रूप में भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ की संस्कृति और परंपराओं को आगे बढ़ाने के लिए लगातार काम किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति को बढ़ावा देने के कारण भूपेश बघेल की प्रदेशवासियों के बीच अलग पहचान बनी है।
कार्यक्रम को महापौर शशी सिन्हा, पूर्व विधायक प्रतिमा चंद्राकर और रामेश्वरी दिवाकर गायकवाड़ ने भी संबोधित किया। विशेष अतिथियों में सभापति केशव बंछोर, राजकुमार देशमुख, जगदीश दीपक, योगिता चंद्राकर, झमित गायकवाड़ और अश्वनी साहू सहित अन्य उपस्थित रहे।
कृषि यंत्रों की पूजा से हुआ हरेली महोत्सव का शुभारंभ
हरेली महोत्सव की शुरुआत पारंपरिक रूप से कृषि यंत्रों की पूजा-अर्चना के साथ हुई। इसके बाद छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति पर आधारित रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। छत्तीसगढ़ी लोक गायक खुमान सिंह यादव और ग्राम के कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से लोगों का मनोरंजन किया।
इस अवसर पर अतिथियों ने ग्राम की प्रतिभाओं और गणमान्य नागरिकों का सम्मान भी किया। कार्यक्रम का स्वागत उद्बोधन पवन बंजारे ने दिया, जबकि आभार प्रदर्शन रोहित धनकर ने किया।
कार्यक्रम में अशोक साहू, रोमशंकर यादव, चेतन साहू, संजय साहू, उमाशंकर साहू, गौकरण साहू, उत्तरा साहू, धनेश्वर साहू, विजय साहू, गायत्री यादव, हिरौंदी साहू, धनेश्वरी देवांगन, मोहन यादव, बीआर मौर्य, डीकेन्द्र हिरवानी, प्रहलाद वर्मा, दिवाकर गायकवाड़, अरुण वर्मा सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
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